अन्ना जी अन्ना जी
खूब भाया हमें आपका रंग , चकित रह गए सब देख आपका ढंग
लेकिन एक बात का गम है , सरकारी दफ्तरों पर तो जन लोक पाल बड़ा दबंग है
परन्तु भारतीय निजी दफ्तर भी नहीं भ्रष्टाचार में कुछ कम
ये भी कही न कही भ्रष्टाचार में है संलिप्त
हमें बताये कब आप लिखेंगे इनपर भी अपनी स्क्रिप्ट
इनकी ओर भी कुछ ध्यान देने की कृपा कर इनका भी कर दे चरित्र थोडा लिफ्ट
और निजी दफ्तरों से जुड़े हर एक वर्ग को भी दे दो अपनी ओर से एक और गिफ्ट.
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